“सपने अपने अपने”

सपनें अलग अलग ,
से होते हैं।
कुछ सपनें हम सब,
सोते हुए,
बंद आंखों से,
देखते हैं।
बंद आंखों से देखे सपनें,
निर्रथक होते हैं।
कभी हम बीती हुई,
घटनाएं भी देख जाते है,
ऐसे सपनों में,
कभी देख जाते हैं,
बिन सिर पैर की बांते,
और कुछ सपनें होते हैं,
मन की कोरी कल्पनाएं।
पर हर इंसान का,
हर व्यक्ति विशेष का,
कुछ न कुछ सपना,
होता है।
जो उसके अंतर्मन में,
जागी आंखों में,
करवट बदल रहा होता है।
माता ,पिता का ,
अपनें बच्चों के लिए ,
देखा सपना।
अच्छी पढ़ाई का सपना।
अच्छी नौकरी का सपना।
सफल होने का सपना।
फिर अच्छे मकान का सपना,
अच्छी गाड़ी का सपना।
अच्छे व्यवसाय का सपना,
कुल मिलाकर,
एक अच्छी जिन्दगी का सपना।
प्रेमी और प्रेमिका के सपनें
कुछ अलग होते हैं।
जो कल्पना लोक में,
विचरते रहते हैं।
पति पत्नी के सपनें,
बिलकुल अलग होते हैं।
एक गरीब का सपना,
कभी सोचा है,
कभी महसूस किया है,
किसी ने।
वो तो सारी उम्र,
काट देता है,
दो वक्त की रोटी जुटानें में।
पटे पुराने कपड़ो में,
अपना तन छिपाने में।
टूटे छप्पर में,
रात गुजारने में।
बच्चों के भी सपनें होते है,
बड़े निराले होते हैं।
आकाश में उड़ते पंक्षी को देख,
उड़ने का सपना।
उड़ते हवाई जहाज को देख,
उसमें बैठ कर उड़ने का सपना।
और न जानें कैसे कैसे सपनें।
जागी आंखो से देखे सपनें,
एक न एक दिन,
जरुर पूरे हो सकते हैं।
हौसला हो,
इरादा हो,
हिम्मत हो,
बस सपना देखो,
जो आपको
सपनें पूरे करने से पहले,
सोने न दे।
सच सपनें सभी देखते हैं।
कोई सोते हुए मीठी नींद में,
और कोई,
जागते हुए खुली आखों से।

-राकेश नमित

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