तगड़ी तुमने जाँच की, सिस्टम था जब ठीक।आख़िर फिर कैसे हुआ, पेपर ससुरा लीक?
पुनः जाल में फँस गई, कठिन परीक्षा नीट।रोका बच्चों को मगर, किया तंत्र ने चीट।।
-चिराग़ जैन ‘चैतन्य’
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