खोल दो वो किबाड़
जिसे कस के बंद किया है,
बहने दो शुद्ध हवा ताजगी भर जायेगी
वो ओस की लंबी लंबी लड़ियां,
सूरज की किरणों संग करती अठखेलियां,
वो महुआ की गमकती महक,
रस्ते पर बिछे पत्तों की खनक,
सागर की गोद में पलता जीवन,
सांस लेती एक दुनिया चेतन अंतरमन
सीप के अंदर पनपते मोती,
किस्मत भी ना हमेशा सोती,
वो लहरों का सर पटक पटक किनारे आना,
फिर वापस सागर की बांहों में लौट जाना,
मन के सागर में छुपी सीप में पलते हैं मोती ,
जाने किसकी किस्मत में होगा ये खजाना।
-नमिता दुबे मिशा
