बात सुनो साथी सारे!
अब स्कूल चलें हम।
खत्म हुई गर्मी की छुट्टी,
अब पढ़ने चलें हम।
अच्छे-अच्छे दोस्त बनाएँ,
जो हों मन के सच्चे।
आगे -आगे हम बढ़ जाएँ,
कभी न हों हम कच्चे।
सभी विषय को हम सब समझें,
किसी को कम न समझें।
सब विषय की अपनी मंजिल,
ये सब अभी से समझें।
विषय अलग हों राह अलग हो।
पर हों दृढ़ के पक्के।
एक दिशा में आगे बढ़कर,
हम बन जाएँ पक्के।
मात-पिता रोशन हो जाएँ,
हम जो नाम कमाएँ।
घर समाज स्कूल हमारी,
हमें देख मुस्कायें।
-सीता गुप्ता
दुर्ग (छत्तीसगढ़)
