सेतु का अर्थ ….
सिर्फ पूल नहीं होता…!
एक बंधन भी है…..!
और
मिलन भी…!!
और बाधाओं को पाटने का…!
एक युक्ति भी…
और पूर्ति भी…..!!
दो जिस्मों के लिए
एक रूह है ये…!
तन्हाइयों का व्यूह है ये….!!
वर्तमान है ये रिश्तों का…
गढ़ता है जो भविष्य…
एक आशा और…
और एक विश्वाश का….!!
कामगार हो या पेशा वाले…
व्यवसायी या फक्कड़ वाले….
यूं कहें तो ढलते दिन की…
आस है ये..!
घर के मुखिया की प्यास है ये…
मन-बंधन की गांठ कह लो…
और दिलों की सांठ है ये…!!
ये सेतु सिर्फ सेतु नहीं….
एक रखवाला है रिश्तों का…
तकरीर कहें इसे जीवन का..
प्रहरी-संगम है पुश्तों का…..!
माध्यम है यह दो-जून का….
हसरत है पिपासा का….
या यूं कहें,एक हमराही है…
साथ-साथ चलने का……!!
ये सेतु सिर्फ सेतु नहीं….
एक प्रतिबिंब है,
वालिद का..
क्योंकि,
वालिद की कदर उनके
रहते नहीं करते,
कुछ लोग….!
और उनके गुजर जाने के बाद,
उनकी कमियां खलती है…..!!
जैसे मानो..
औलाद टूअर-सा हो गया हो..
मरुस्थल से जैसे मरूद्यान गायब …!
अहसास तब होता है कि….
उनका साथ,
अप्रतिम,अलौकिक था…!
प्रौढ़ आश्रम में..
भेजना उनको ….!
एक त्रासदी थी मेरे लिए….!!
उनका एक पल का साथ भी
मेरे लिए सदियों-सी लंबी थी….!
जो सदैव चुभती है …
और चुभती रहेगी अनवरत….!!
एक सेतु भी …
वालिद से कम नहीं…
उनकी सुरक्षा,
उनका रख-रखाव भी,
वालिद से कम नहीं होनी चाहिए….
क्योंकि एक वालिद ही हैं जो हमें ,
सदैव ढोते हैं, निस्वार्थ भाव से…
कभी कुछ नहीं कहते…
अहरनीशे करते…..
सिर्फ कल्याण हैं…!!
एक पाषाण-सेतु की तरह….!
मूक,स्तब्ध और अडिग,
और अविचल-सा…..!
हमारे अस्तित्व की पहचान है ये…
विद्वता का सार है ये….!
इसलिए…
उनका सुरक्षित रहना ही….
हमारे जिंदा होने का ..
प्रमाण है…!
एक मात्र प्रमाण है……!
एक मात्र प्रमाण है……!!
-प्रदीप हंसराज
एसबीसी मॉडल उच्च विद्यालय
लत्तीपाकर,गोपालपुर
भागलपुर
