मन के भावों से साक्षात्कार करवा दे,
वो भाव है कविता।
शब्दों के ढेर से कुछ नहीं होता,
स्याही से नहीं,
एहसासों से लिखी जाती है कविता।
हर्ष, विषाद, गम, खुशी,
हर भाव बोलती है कविता।
सच ही तो है,
स्याही से नहीं,
एहसासों से लिखी जाती है कविता।
कभी हारे को जीतने का,
कभी रोते को हंसाने का,
बीच की दूरी मिटाने का,
बीड़ा उठाती है कविता ।
सच ही तो है ,
स्याही से नहीं, एहसासों से लिखी जाती है कविता।
-सोनम लड़ीवाला
जयपुर (राजस्थान)
