हिन्दी ही क्यों

संस्कृति की झलक दिखाती,
सभ्यता का पाठ पढ़ाती,
ऐसी प्यारी हिंदी हमारी,
देश-विदेश में मान बढ़ाती।।

      भाषा जिसका प्रत्येक मानव के जीवन में एक अहम स्थान होता है। भाषा ही है जो हम सबको एक दूसरे से जोड़कर रखती है;;; भाषा से ही हम अपने विचार एक दूसरे को आदान प्रदान करते हैं। बिना भाषा के किसी भी राष्ट्र की उन्नति संभव नहीं है;;;उस राष्ट्र की भाषा ही उसे एक विकास की ओर ले जाती है,उन्नति के पायदान पर चढ़ाती है। मानव के जीवन में भाषा का बहुत अधिक महत्व होता है।राष्ट्र उसी भाषा के कारण संगठित और विकास की ओर अग्रसर होता है। एक भाषा ही उस देश को मान और सम्मान दिलाती है। विश्व पटल पर एक अहम स्थान दिलाने में उस देश की भाषा की अहम् भूमिका होती है।

   भारत ऋषि-मुनियों की भूमि है, पावन धरा है। हमारी प्राचीन पवित्र भाषा संस्कृत थी और इस संस्कृत से ही हिंदी का जन्म हुआ इसलिए हम सब हिंदी को संस्कृत की बड़ी बेटी कहते हैं। हमारे यहां हिंदी को हिंदी माँ का दर्जा दिया जाता है।इतिहास के पन्ने पलटे तो भारत को प्राचीन समय में विश्व गुरु कहा जाता था,जब पूरा विश्व अंधकार में डूबा हुआ था, उस समय भारत की सभ्यता और संस्कृति चरम सीमा पर थी;;;; उस समय भारत की प्राचीन अर्थव्यवस्था, सभ्यता, संस्कृति ,राजनीति,चिकित्सा पद्धति, लोगों का ज्ञान इतना समृद्ध था कि वह विश्व के किसी भी देश से सबसे अधिक था और इसमें हिंदी भाषा का ही एक अहम योगदान था। बिना हिंदी भाषा के तो यह कुछ संभव ही नहीं था।
      हमारे भारत में शिक्षा और शिक्षण कार्य को बहुत ही पवित्र कार्य माना जाता है।

एक बार फिर इतिहास के पन्ने पलटा कर देखें तो प्राचीनतम योग वैदिक योग में तक्षशिला, मिथिला, भारत निकुंज, धारा तंजोर शिक्षण के मुख्य केंद्र थे। विश्वविद्यालय की संकल्पना का उदय भारत में ही हुआ ।उस समय प्राचीन भाषा हमारी संस्कृत;;और इसी संस्कृत से हिंदी का जन्म हुआ। पूरे भारत में प्राचीन समय में १३ बड़े विश्वविद्यालय थे। भारत की आन बान शान इसी हिंदी के कारण थी। विश्व जगत में नाम भी प्राचीन समय से लेकर आज तक हिंदी के कारण ही है।आज से सैकड़ों साल पहले भारत में ऐसी शिक्षा के केंद्र थे;; जिनका स्वरूप आज के विश्वविद्यालयों जैसा ही था।
गणित शिक्षा, सैनिक शिक्षा ,ज्योतिष शास्त्र, भूगोल विज्ञान के साथ अन्य विषयों की शिक्षा देने में कोई भी देश बराबरी नहीं कर पाया। आर्यभट्ट भट्टाचार्य ने गणित के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। गणित की गिनती हमारी भारत की ही देन है आज दुनिया के दर्जनों विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जाने लगी है।हिंदी संस्कृत से निकली और इसमें दर्जनों एशियाई भाषाओं का संगम होने से हिंदी का शब्द भंडार दुनिया के किसी भी भाषा से बहुत अधिक है।हिंदी भाषा के विदेश में भी विकास होने से कई विदेशी भी हमारे यहां पढ़ने आ रहे हैं ।भारत को योग और अध्यात्म का प्रमुख केंद्र माना जाता है ।आज धर्म की शिक्षा पूरे विश्व में विख्यात है ।इसी धर्म दर्शन की शिक्षा के लिए भी विदेशी भारत की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा की बैठक में हमारे पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई ने विदेश मंत्री के रूप में पहली बार अपना भाषण हिंदी में देकर भारत का मान बढ़ाया और इससे दुनिया भर के विश्व पटल पर भारत को एक अहम स्थान मिला।माननीय मोदी जी, सुषमा स्वराज जी ने भी विदेशी सर जमीन पर हिंदी में भाषण दिया और इससे कहीं न कहीं भारत का मान सम्मान देश विदेश में भी बढ़ा।
आज प्रश्न है हिंदी ही क्यों???
हम जानते हैं हिंदी हमारी राजभाषा है ।आज भारत की तीन चौथाई जनसंख्या हिंदी बोलती, लिखती और पढ़ती है।हिंदी भाषा एक बहुत ही प्राचीन भाषा है, जो लगभग 1000 वर्ष पुरानी है। हिंदी से ही देश मे॑ पत्रकारिता को एक नई दिशा और दशा मिली, जिसका राष्ट्र के नवनिर्माण में एक अहम योगदान रहा है ।इसने भारत को विश्व में एक नई पहचान दिलाई और भविष्य में भी यही हिंदी भाषा हमें;;! हमारे राष्ट्र को विश्व में नई ऊंचाई तक ले जाएगी। आज हिंदी भाषा के कारण हमारा देश विदेश में भी मान सम्मान बढ़ रहा है। हमारे अनेक साहित्यकारों ने हिंदी भाषा को समृद्ध किया और उसके ही द्वारा हमारे नए साहित्यकारों को एक नई पहचान मिली।
हिंदी भाषा ने हमारे राष्ट्र को सामाजिक,आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक सभी रूप से समृद्ध किया। आज देश के साथ-साथ विदेश में भी हिंदी भाषी की संख्या बहुतायत रूप में देखने को मिल रही है।
हिंदी भाषा एक बहुत ही सरल और मीठी भाषा है, जो गांव को शहर से जोड़कर रखती है। हिंदी भाषा में एक अलग ही सोंधी खुशबू आती है। जो हमें अपनी माटी से जुड़ने का एहसास दिलाती है। आज हिंदी भाषा भारत की सभ्यता और संस्कृति की भी परिचायक है।हिंदी भाषा के कारण हमारे युवाओं को अनेक प्रकार के रोजगार के कार्य भी मिल रहे हैं।
भारतेंदु हरिश्चंद्र के अनुसार मातृभाषा की तरक्की से ही राष्ट्र की उन्नति एवं प्रसिद्धि संभव है;;;;। भारत को आजाद करने के लिए स्वतंत्रता संग्राम के समय कवियों ने हिंदी में ओजपूर्ण कविताओं का गान किया। देशभक्ति से परिपूर्ण कविताएं लिखी गई और उनसे देशवासियों में आजादी की भावना की अलख जगाई गई। हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर उन गीतों का भी बहुत अधिक प्रभाव पड़ा और उसका असर आजादी के समय के आंदोलन में देखने को भी मिला।पूरे देश के कवियों नेअपनी वाणी को जन-जन में पहुंचाने के लिए हिंदी का ही सहारा लिया।
आज हम सब मिलकर जन-जन में हिंदी की अलख जगाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि हिंदी हमारी राजभाषा से राष्ट्रभाषा बन सके।
अंत में उपसंहार यही है कि वर्तमान परिस्थितियों में भारत को प्रगतिशील देश बनाने में हिंदी का ही बहुत अधिक योगदान है। हिंदी भाषा के कारण ही आज विश्व जगत में भारत का एक विशेष स्थान है। हिंदी से ही हम सब हैं।

आओ एक काम करने चलें
जन-जन में हिंदी की अलख जगाने चलें।।

-साधना छिरोल्या
दमोह(मध्य प्रदेश)

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