एक बार एक अठारह वर्ष के बच्चे का बाइक चलाते हुए एक्सीडेंट हो गया । सड़क पर बेहोश पड़ा था, लोग देख देखकर जा रहे थे लेकिन कोई उसे संभालने नहीं आया । अपने अपने नजरिये से सब टिप्पणी करने लगे । कोई बोला इतने छोटे बच्चे को बाइक देने की क्या जरूरत थी, कोई बोला जरूर बुरी लत होगी, पीकर चला रहा होगा। एक बोला मासूम सा दिख रहा है, पता नहीं किस बुरे कर्म का फल मिला है । एक बोला कोई पुराने कर्म का फल होगा जो ऐसा हुआ । सब बोल बोलकर चले गए । पुलिस ने देखा तो एंबुलेंस से हॉस्पिटल ले गए, मोबाइल नंबर देखकर माता पिता को फ़ोन किया, जब तक माता पिता आए बालक की मृत्यु हो चुकी थी ।
सड़क पर लगे सीसीटीवी कैमरे से जाँच की गई तो पता चला कि पीछे से कोई बड़ी गाड़ी बहुत तेज गति से आ रही थी और उसी ने पीछे से टक्कर मारी और बालक आठ दस फीट तक घिसटता चला गया और सर से खून बहने लगा ।
अपना अपना नज़रिया किसी काम नहीं आया, सबके आंकलन ग़लत साबित हुए । इसलिए किसी घायल को देखो तो तुरंत उसका उपचार कराओ ताकि वो बच सके, न कि अपनी राय देकर आगे बढ़ जाओ । लेकिन ये तो जमाने की आदत है कि अपनी मौज में चलते रहो, क्यों व्यर्थ में किसी को बचाने में उलझना ।
-पिंकी परुथी ‘अनामिका’
