हे परमात्मा! हे भगवान् !
सुन ले तू खोल के कान
क्यों बनाए तूने ये इंसान
लड़ते और झगड़ते रहते
ले लेते एक दूजे की जान।
इंसानियत को दिया भुला
बनते जा रहे ये अब हैवान
कभी न सोचा होगा तूने ये
लगा है करने इंसां जो काम |
दिमाग दे दिया इंसां को तूने
कुछ तो सोचा ही होगा तूने
इंसां चतुर चालाक निकला
लगा मारने नहले पर दहला
चलाने लगा अपनी ये मर्ज़ी
दीवार धर्म की खड़ी कर दी
धर्म के नाम पे करता है दंगे
टांग तेरे निज़ाम में घुसेड़ दी
पर्यावरण का नाश कर डाला
नदियों को भी दूषित कर डाला
है प्रभु,!इन पर लगाम लगा दे
दुनिया को ये जहन्नुम न बना दें
ये देख हो रहा होगा तू भी हैरान
मूंदी क्यों आँखें बंद हैं क्यों कान
डरता नहीं अब तो तुझ से भी ये
गया है निकल हाथ से तेरे इंसान
क्या घड़ा पाप का भरा नहीं,जो
बैठा कहीं खोह में बन अनजान |
बलात्कार ,दरींदगी और हत्याएँ
हुआ अब तो ये रोज़मर्रा का काम
लगाम लगा बेलगाम इंसानों पर
हे मेरे ईश्वर !अब तू ही कुछ कर।।
-रामकिशन शर्मा
