बिल्ब पत्र न मिले कोई गम नहीं
शमी न हाथ आए कोई डर नही,
न हो दूध गंगा का जल अभिषेक
ले कर भाव मन कर तू अभिषेक।1।
न धतूरा न कनेर न हो शंखपुष्प
लेकर साथ जाना तू श्रद्धा पुष्प,
न हो अक्षत न तिल शर्करा शेष
करना सदा विश्वास से अभिषेक।2।
न भोडर गुलाल न चंदन इत्र पवित्र
लेकर साथ जाना तुम वंदना पवित्र,
न हो भांग भोग बेर केला और सेब
करना तू वचन मीठे संग अभिषेक।3।
न हो बाती घृत कर्पूर दीप और तेल
सुगंध धूप होम हवन का कोई मेल,
न बाजे डमरूमृदंग घंटी का हो शोर
स्वर प्रार्थना के हो साथ हों अभिषेक ।4।
सजावट द्वारचार कर नहीं कोई श्रृंगार
चुनके फूल प्रेम के माला स्नेह अपार,
चढ़ाना भोला भाला मन ऊपर महेश
शिव को भाता भोला भाला अभिषेक।5।
हलाहल जीवन का त्रिशूल शंकर पाता
सती गौरी आराध्य महामृत्युंजय गाता,
आधा चंद्र परिक्रमा आधी अर्धनारेश्वर
पूर्ण करता कामना सुनो नंदी अभिषेक ।6।
थाली भर संस्कार विश्वास भावभर मन
करने आया पूजा उम्मीदें हाथ जोड़कर,
हे महादेव हृदय बिराजो भक्ति दो विशेष
शब्द शब्द सहज करते अर्पण अभिषेक।7।
।। हर हर महादेव।।
– संदीप नेमा ‘दीप’ भोपाल
