नन्हे कदमों से नापेंगे हर मंजिल की लंबी दूरी
रास्तों की कोई भी बाधा नहीं बनेगी अब मजबूरी
बीते कल की करुण कहानी भूल चले,
आओ हम स्कूल चलें।
हमको एक दिन अपना सपना गढना है
आने वाले कल का सूरज बनना है
नये हौसलों की राहें अनुकूल चलें
आओ हम स्कूल चलें।
दूर पर्वतों से सीखेंगे “अडिग रहो
हर झंझा हर तूफानों में डटे रहो
चलो साथ चलकर साथी नभ छू लें।
आओ हम स्कूल चलें।
-पद्मा मिश्रा
जमशेदपुर
