उदासी है, दवा है और मैं हूँ,
सदा माँ की दुआ है और मैं हूँ।
हुए बच्चे हैं घर से दूर जबसे,
कि घर सूना पड़ा है और मैं हूँ।
नहीं अब रौशनी आती कहीं से,
अँधेरा है, दिया है और मैं हूँ।
सभी सोये, यहाँ है रात गहरी,
दिखा चंदा जगा है और मैं हूँ।
सितमगर अश्क़ देकर जा चुका है
ग़मों का क़ाफ़िला है और मैं हूँ।
भरोसा उठ गया तेरी वफ़ा से,
बची अब वेदना है और मैं हूँ।
-नीलू चौधरी
