कम से कम दुनियादारी तो निभाते रहिये

कम से कम दुनियादारी तो निभाते रहिये
ताले यूंही लोगों के मुँह पर लगाते, रहिये।

पैदा होते ही रिश्ते खून के जो जाते हैं बन
यथासम्भव उनको टूटने से बचाते, रहिये।

सम्पर्क न रहे तो रिश्ते पड़ जाया करते ठंडे
एक दूसरे के यहाँ सदा आते जाते, रहिये।

लड़ते रहो झगड़ते रहो रुठते रहो मनाते रहो
नहीं है अनबन लोगों को ये दिखाते, रहिये।

सुनी सुनाई बात पे करना न कभी भी यकीं
पता असलीयत का लेकिन लगवाते, रहिये।

गंदगी साफ नहीं की जा सकती गंदगी से
आग बदले की न दिल में धधकाते, रहिये।

इकट्ठा न होने दें दिल में कूड़ा अफवाहों का
समय समय पे झाडू इन पर फिराते, रहिये।

दूजों की सफ़लता पे करें सदा खुशी ज़ाहिर
ईर्षा द्वेष से दिल अपना ना जलाते, रहिये।

भरें कान लोग आके, करें बुराई वो जिसकी
आप तो अच्छे काम उसके गिनवाते, रहिये।

लोगों की तो होगी कोशिश रूलाने की तुम्हें
आप मुस्करा कर खीझ उनकी बढ़ाते, रहिये।

-रामकिशन शर्मा

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