कलम नहीं तलवार है यह,
सबका ही हथियार है यह l
जिम्मेदारी का बोध कराती,
खुद भी जिम्मेदार है यह l
डगमग कदम सँभाले इसने,
शब्दों को विस्तार दिया
बिन रण के ही बाजी जीती,
हर दुश्मन को मार दिया l
हर पल मेरा साथ निभाती,
पहला-पहला प्यार है यह l
कलम नहीं तलवार है यह l
भूख,गरीबी और बेकारी,
भोजन हैं इसके सारे l
काँपे अशिक्षा, खड़ी-खड़ी,
शिक्षा इसके गली-चौबारे l
अपनी उँगली, हाथ थमा दें,
बच्चों का अधिकार है यह l
कलम नहीं तलवार है यह l
जगमग सारा जग कर देती,
उजियारा फैलाती है l
हर कर सारा तम दुनिया का,
नया सवेरा लाती है l
रग-रग में दौड़े राग खुशी का,
खुशियों का संचार है यह l
कलम नहीं तलवार है यह l
-अलका अग्रवाल
