कह दो रुसवाईयों से आए ना संग मेरे
थक चुकी हूं मैं,बैरी इन बेरियों से
एक पल भी गवारा नहीं बिन तेरे
तू ही मंजिल मेरी तू ही हमराह मेरे
इन दरख्तों की छांव में मुझे रहने दो
तन्हाइयों की अंधेरी रातों से डर लगता है
कभी न जाना तू मेरी पनाहों से
तू ही सपना मेरी तू ही हो ख्वाब मेरे
नहीं मायने मुझे इन समाज के ठेकेदारों से
उड़ना चाहती हूं मैं बस मुझे पंख दे दो
मेरी इनायत है मुझे बस तुझसे
आ भी जाओ आज महफिल में मेरे
मेरी दुनिया मेरी तकदीर हो तुम
मेरी जिंदगी की वजह हो तुम
तेरे लिए ही मैंने सब कुछ छोड़ा है
ना होगी पूरी मेरी तमन्ना बिन तेरे
मैं तो बहती दरिया हूं तुम समंदर मेरे
तेरी गहराईयों में डूबना चाहती हूं मैं
तुझ में खुद को खोना चाहती हूं मैं
मैं बहती धारा हूं तू ही साहिल मेरे।।
– पूनम सिंह
