खूबसूरत लम्हों का साथ है ना
दूर से सही, सुनों ना
तुम्हारे हाथो में मेरा हाथ है ना ….
यादों का पहर यूँ भी
साथ- साथ हैं ना
गुज़रे कल की बात साथ है ना…
मौन से मौन हज़ार बातें
चाहतों का आसमां है ना
मन में छुपाने का अंदाज़ साथ है ना …
दूरियां भी बहुत साथ दे रही
ये तुम्हारा एतबार है ना
दर्द गवाही देता कि तुम्हें प्यार है ना ..
दिनभर के आपाधापी के बाद
सुबह का शाम है ना
बस ऐसे ही तुम्हारे आदतों का
ज़िंदगी को यूँ भी करार है ना…
ज़िंदगी के हर रंग में दिखे
ख्वाबों का अपना जहाँ और
हसरतों का कोई एक अंजाम है ना ..
कि झूठ -सच से परे तुम्हे भी तो
किसी का चुपचाप इंतज़ार है ना .!!
-नंदिता तनूजा
