कॉकरोच खराब है
कि मच्छर खराब हैं
कि मौसम खराब है
कोई तो बताए
और क्या-क्या खराब है
गर माना भी लें
सब कुछ खराब है
पर क्यों है
क्या इसका कोई हिसाब है
क्या इसका कोई जवाब है
जो आज इसको
खराब बताते हैं
कल इसको ही अच्छा बताएंगे
अच्छा बताने वाले
कल ही इसको खराब बताएंगे
ये सब कुछ
सभी कुछ पाने की भूख का
मकड़जाल सा जंजाल है
कल भी यही था
आज भी यही हाल है
मुखोटे बस बदले हैं
कर्मों से किसे काम है
ये कैसा माहौल
ये कैसा निजाम है
-“मंगल” जितेंद्र
