ख्वाब

भीगी आँखों ने ख़्वाब बुना
दर्द होता है सौ – सौ गुना
इस जहॉं में है कौन अपना
दर्द होता है सौ – सौ गुना

फ़रियाद सुनी ना रब ने मेरी
हर साँस मेरी है दुःख से भरी
इन दीवारों में, है ढहना
दर्द होता है सौ- सौ गुना

महरूम रहे ख़ुशियों से भी हम
इस दिल पे हुए है लाखों सितम
बंदिशों में ना रहते बना
दर्द होता है सौ- सौ गुना

हम दिल की सुने,या जग की सुने
ख़ुशियों को चुनें, या ग़म को चुनें
इन निग़ाहों ने अश्क़ चुना
दर्द होता है सौ – सौ गुना

भीगी आँखों ने ख़्वाब बुना
दर्द होता है सौ- सौ गुना
इस जहाँ में है कौन अपना
दर्द होता है सौ- सौ गुना

-निर्मला त्रिवेदी

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