गर्मी है

तपन का हो अहसास तो समझो गर्मी है
लगने लगी हो प्यास तो समझो गर्मी है
ठंडा पीने का जब जब मन करता हो
कोई बुझा दे प्यास तो समझो गर्मी है

बिन एसी कूलर पंखा न रह पाए तो
समझो गर्मी है
मच्छर भून भून करते पास आए तो
समझो गर्मी है

बिकने आए तरबूज खरबूजा खीरा तो
समझो गर्मी है
बिक जाएं कोक लस्सी जलजीरा तो समझो गर्मी है

लदे हुए हो आम पेड़ की साँखों पर तो समझो गर्मी है
धूल के कण जाते जलन आँखों पर तो समझो गर्मी है

-किशोर छिपेश्वर “सागर “
बालाघाट

एक उत्तर छोड़ें

अन्तरा शब्दशक्ति – हिन्दी साहित्य, प्रकाशन और रचनाकारों के सशक्तिकरण का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच।
संपर्क करें
antrashabdshakti @gmail.com
Call- 9009423393
WhatsApp-9009465259
antrashabtshakti.com

Copyright © 2026 Antra Shabd Shakti. All Rights Reserved. Powered by WebCoodee

0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x