कदम है छोटे
लक्ष्य बड़े हैं
सुनहरे सपने
बस्ते में पड़े हैं।
घरौंदे से बाहर
कदम बढ़ाते चूजे
ले हाथों में हाथ
विश्वास से एकदूजे।
दुनिया की दौड़ में
शामिल हो जाएंगे
पढ़ लिख कर लक्ष्य
जब अपना पाएंगे।
ज्ञान का दीप जला
अंधियारे दूर करेंगे
ये नौनिहाल एक दिन
बुढ़ापे की लाठी बनेंगे।
-कीर्ति प्रदीप वर्मा
