घातक

उद्दण्ड, उछलते, गंदले मैले और प्रदूषित,
हर बहते को साथ जोड़ना घातक है।
विषबेलों के खिले सुगंधित, मन को भाते,
भीने-भीने, रंगबिरंगे, पुष्प तोड़ना घातक है।
घातक हैं वो कर्महीन, संकल्पहीन, आधारहीन,
जो पाखण्डी यशविहीन हों निपट स्वार्थी,
असर्मथों का क्षणिक समर्थन पाने हेतु,
उनके सम्मुख हाथ जोड़ना घातक है।

-चौ. मदन मोहन समर

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