“सोना – कनक – स्वर्ण”
चाहे हो ख़ूब सोना चाँदी
चाहे हो धनदौलत का अम्बार
मगर दिल के किसी कोने में
न हो किसी ग़रीब के लिए प्यार
या न हो मन में इंसानियत का विचार
हो सारा कुछ समझ लो
जीवन में है बेकार
गर दिल में किसी के लिए
प्यार नहीं
देने के लिए मुट्ठी बंद
तो समझो तुम्हारी
क़िस्मत के दरवाज़े भी बंद
किसी को चाहत नहीं होती
किसी के पैसे कौड़ी की
होती है एक आशा तो
तुमसे सदाचरण की
-अदिति रूसिया
वारासिवनी
