वृंदावन का धाम।
मन हो गया निष्काम।।
बृज रज का मिला साथ।
जब थाम लिया तेरा हाथ।।
कण-कण में तेरा आभास।
आभा-मण्डल है पास।।
बस राधा नाम आधार।
शाश्वत प्रेम आकार।।
दिन रात दिखा तेरा साथ।
जब थाम लिया तेरा हाथ।।
वृषभान की दुलारी।
बरसाने की प्यारी।।
ललिता विशाखा लाली।
वृंदावन धाम निराली।।
राधा-कृष्ण का रास।
निधिवन का आभास।।
अप्रतिम प्रेम प्रसंग।
राधा-कृष्ण के संग।।
लता कुंज पहचान।
गोपियां बनी सुभान।।
पुरुषोत्तम मास अभिराम।
कान्हा थाम लिया तेरा हाथ।।
-प्रेम सिंह “काव्या”
छत्तीसगढ़
