पथ की बाधाओं से मैं भयभीत कभी न होऊँगा,
सामना करूँगा हिम्मत से तो निश्चित ही विजयी हूँगा।
रस्ते के पत्थर मेरे लिए मंजिल की सीढ़ियाँ बन जाएं,
राहों में बिछे शूल सारे, फूलों की माला बन जाएं।
माना कि मंजिल दूर मेरी, पर बहुत सरल हो जाएगी।
जब थाम लिया है हाथ तेरा, हर मुश्किल हल हो जाएगी।
बढ़ता जाऊँगा बिना डरे, अपनी मंजिल की ओर।
दुख के बादल छँट जाएंगे, आएगी सुहानी भोर
-राधा गोयल
विकासपुरी (दिल्ली)
