जब थाम लिया है हाथ तेरा,
फिर राह कोई अनजान नहीं,
तू साथ रहे तो मुश्किल भी
लगती मुझको आसान वहीं।
तू साथ चले तो पथरीली
राहें भी अपनी लगती हैं,
कुछ चोटें फूलों-सी कोमल,
कुछ ठोकर अच्छी लगती हैं।
न मंज़िल की जल्दी मुझको,
न पीछे मुड़कर जाना है,
तेरे संग चलते-चलते ही
मुझको जीवन पा जाना है।
कुछ तू अपनी कह देना,
कुछ मैं मन की कह दूँगी,
जो बात अधूरी रह जाए,
आँखों से पूरी कर दूँगी।
सुख आए तो हँस लूँगी मैं,
दुख में तेरे साथ रहूँगी,
तू थोड़ा-सा मेरा मन रखना,
मैं तेरा मन रख लूँगी।
न वादा चाँद-सितारों का,
न सात जनम की बात करूँ,
जितना जीवन हाथ में है,
उतना तेरे साथ चलूँ।
कल की मुझको फ़िक्र नहीं,
आज यही विश्वास मेरा,
अब छोड़ूँगी मैं साथ नहीं,
जब थाम लिया है हाथ तेरा।
-डॉ. प्रीति समकित सुराना
