ज़िंदगी के कैनवास में, कभी मौकों की कमी नहीं होती।

मन के कोरे कागज़ में हम जो चाहे लिखते, मिटाते हैं।
यह हमारी इच्छा है। लिखने, मिटाने की कोशिश करते, कुछ ऐसा लिख लेते हैं, गीत बन जाते हैं।

उसी तरह ज़िंदगी के कैनवास में, जो चाहे चित्र उतार सकते हैं, बशर्ते ज़िंदगी के कैनवास पर कर्मों की तूलिका में सपनों के रंग भरें। सपनों के रंग में मंजिल का आधार, दृढ़ इच्छाशक्ति का जीवंत चित्र उकेर दे। कल्पना की उड़ान, यथार्थ के गगन चूमते चाँद-सितारे से बातें कर ले।

अवसर (मौके) सामने आते हैं, हवा के झोंके की तरह, और तेजी से निकल भी जाते हैं। सामने आए हुए मौकों के चले जाने के बाद पीछे से ढूँढना असंभव है। हवा को छू नहीं सकते, महसूस किया जाता है।
मौकों के स्पर्श का आभास जो कर लेते हैं, वहीं हवा की गति के साथ लक्ष्य को लगन से प्राप्त करते हैं।

ज़िंदगी ने मौका नहीं दिया, यह हो ही नहीं सकता। कई-कई बार मौके सामने आते हैं। हम कामनवेल्थ की मेज़बानी करते हुए, मौके पर चौका-छक्का गँवा देते हैं। वहीं कुछ लोग टौंटी-टौंटी के मुकाबले में ओलंपियाड के स्वर्ण पदक जीत लाते हैं।
बस, मौकों को मौके पर ही पहचान लेने का आभास ही सफलता है।
ज़िंदगी में मौकों की कमी नहीं है।

जीवन-सिंधु में गहरे अवगाहन कर डुबकियाँ लगाते, जो डूब जाए और तैरकर निकल ले, या तिनके के सहारे, यह उसकी चेतना पर निर्भर है।
कैनवास के चित्र तो, जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि, के सिद्धांत पर खरे उतरते हैं।

जीवन में सुख-दुख, दिन-रात, धूप-छाँव, आँसू-मुस्कान, फूल-काँटे, जीत-हार, ज़िंदगी के कैनवास के बहुरंगी चित्रों का समूह है।
नज़र हटी, घटना घटी, तो हम ट्रकों के पीछे पढ़ते ही आए हैं।
पर इन वाक्यों पर अमल नहीं करते।
मौके नज़र के सामने से गुजरने के बाद लौटते बहुत कम हैं।

हाँ, एक जीवंत उदाहरण ये भी है, यदि ज़िंदगी ने मौके पर मौकों को पकड़ लिया, तो रेत में आँसू की पीड़ा लिखते-लिखते, नायाब चित्रकार सुदर्शन पटनायक जैसे अनमोल रत्न निकलते हैं।

जिनकी मंजिल रेत से हुनर बन, वैश्विक मंच पा लेती है।

मीरा चानू बैलगाड़ी खरीदने की कल्पना करते हुए, विश्व विजेता बन जाती है। वो तब, जब विपरीत परिस्थितियाँ थीं, सारी उसके अनुकूल हो गईं।

अतः जब चाहें, तब कैनवास पर कूँची चलाते, रंग भरते रहना ज़रूरी है। जीवन का हर रंग, हर स्वरूप, हमारे मन की हिम्मत और आत्मविश्वास से मिलकर अमूल्य बन जाता है।

ज़िंदगी के कैनवास में कभी मौकों की कमी नहीं होती। क्या पता, अंतरा-शब्द शक्ति का सफर, हमसफ़र प्रीति के साथ, सपनों का अंतरिक्ष दे दे।

-अमितारवि दुबे
छत्तीसगढ़

एक उत्तर छोड़ें

अन्तरा शब्दशक्ति – हिन्दी साहित्य, प्रकाशन और रचनाकारों के सशक्तिकरण का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच।
संपर्क करें
antrashabdshakti @gmail.com
Call- 9009423393
WhatsApp-9009465259
antrashabtshakti.com

Copyright © 2026 Antra Shabd Shakti. All Rights Reserved. Powered by WebCoodee

0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x