यह पंक्ति जीवन को एक कैनवास और हमें चित्रकार मानती है। जिंदगी हमको की मोके देती है प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप में,,,, कभी कभी होता है कि हम रंग कुछ भरना चाहते हैं परंतु हमारी मेहनत हमारा साथ नहीं देती और हम कहते हैं तकदीर में से होना लिखा था।ये सच है कि ईश्वर हमारे जन्म से हमारी किस्मत लिख देते हैं और हम कहते हैं ऐसा होना ही था।
परंतु तदबीर से तकदीर को बदला जा सकता है।हमारी जिंदगी कैनवास की तरह है जिसमें हम अपनी लगन, मेहनत, आत्मविश्वास और इच्छा शक्ति से अपनी पसंद के रंग भर सकते हैं। और एक बार रंग फैलजाने पर वह दुबारा मौका ,तीबारा मौके भी देती है।
- जीवन एक खाली कैनवास है:
हम सब जन्म के समय एक कोरे कैनवास जैसे होते हैं। उस पर क्या रंग भरने हैं, कौन सी तस्वीर बनानी है, ये हम तय करते हैं। कैनवास कभी छोटा नहीं पड़ता, न ही रंग खत्म होते हैं। - मौके रंगों की तरह हैं:
सूरज का उगना एक मौका है नई शुरुआत का। किसी का मिलना मौका है रिश्ता बनाने का। ठोकर खाना मौका है संभलना सीखने का। दुख, सुख, सफलता, असफलता- हर अनुभव एक अलग रंग है। कैनवास पर ये रंग हमेशा मौजूद रहते हैं, बस हमें ब्रश उठाना होता है। - कमी नजरिए में होती है, मौकों में नहीं:
अक्सर हम कहते हैं “मौका ही नहीं मिला”। असल में मौके हवा की तरह हैं – दिखते नहीं पर हर जगह होते हैं। जो आँखें बंद रखेगा उसे अँधेरा ही दिखेगा। जो देखने का हौसला रखेगा, उसे हर मोड़ पर एक नया दरवाजा खुला मिलेगा। - चित्र बिगड़ भी जाए तो क्या:
कैनवास की खूबी यही है कि एक रंग के ऊपर दूसरा रंग चढ़ सकता है। एक गलती पूरी पेंटिंग खराब नहीं करती। जिंदगी भी हमें बार-बार मौका देती है – फिर से शुरू करने का, बेहतर बनाने का, दाग को डिज़ाइन में बदलने का।
शिकायत मत करो कि कैनवास खाली है। शुक्र करो कि वो तुम्हारे हाथ में है। रंग तुम्हारे पास हैं, ब्रश तुम्हारे पास है। मौकों की कमी नहीं, बस उन्हें पहचानने वाली नजर और भुनाने वाली हिम्मत चाहिए।
जिंदगी रोज सुबह एक नया कैनवास देती है। अब उस पर क्या बनाना है, ये हम ही जानते है क्या करेंगे हम,,,,,
-मंजू सरावगी ‘मंजरी’
रायपुर (छत्तीसगढ़)
