जिक्र तेरा सनम… हर लफ्ज में करेंगे हम
बेफिक्र रहना तू… तेरा नाम नहीं लेंगे हम
देख तुझे दूर से ही तन्हा…जी लेंगे हम
तेरी खामोशी का सनम … दर्द सह लेंगे हम
तू मुखातिब मेरे होगी….और मेरे पास में भी
तेरी बेरुखी का जहर घुटकर… के पी लेंगे हम
मेरे हर शेर हर गजल में….तेरी रवानी सनम
ख्वाबों के अंजुमन में कैद… तुझे कर लेंगे हम
न होने देंगे तुझे रुसवा… इस जहाँ में हम
तेरी खातिर “स्वाति” उल्फत…दफन कर लेंगे हम
-श्वेता गर्ग स्वाति
ग्वालियर (म.प्र.)
