जो नाव किनारे से छूट गई,
उसे पुकारने से नदी नहीं रुकती!
लहरें उसका नाम
कुछ दूर तक दोहराती हैं,
फिर जल की भाषा में
सब कुछ बह जाता है!
दुआ करो,
उस नाव की परछाईं भी
धीरे-धीरे धुंध में विलीन हो जाए,
ताकि तुम्हारे भीतर का तट
फिर किसी नए सूर्योदय का
स्वागत कर सके!!
-डॉ अभिलाषा तिवारी
