तुम हो तुम

मेरे दिल का एक कोना
खाली है तुम्हारे लिए
जहां सिर्फ तुम रहते हो,
इस तरह तुम हर पल मेरे संग रहते हो
फुर्सत में, मैं तुमसे बातें करती हूं
तुम कहते हो मैं सुनती हूं
मैं कहती हूं तुम सुनते हो।

कभी कभी मैं करती हूं बचकानी बातें
तुम धीर गंभीर चुप रहते हो
जताते नहीं कोई प्रतिक्रिया
कभी करती हूं बेगानी बातें
तुम सौम्य समीर मुस्काते हो
इस तरह तुम मेरे दिल में उतर जाते हो।

तुम ख्याल बनकर
मुझमें ठहर गए हो
गहराई से दिल में समाकर
सम्मान का ऊंचा मुकाम पा गए हो,
मेरे वजूद का हिस्सा हो
मेरी मौजूदगी का खूबसूरत किस्सा हो
मेरे जीवन की आस, मेरे अधरों की प्यास
मेरी सांसों का हिसाब हो।

तुम मेरी धड़कनों का साज हो
जहां मैं लय बनकर थिरकती हूं
मेरे अस्तित्व का विहंगम आकाश हो
जहां मैं मगन होकर विचरती हूं
मेरे प्यार की जमीं, सुंदर आवास हो
जहां मैं सजती संवरती हूं।

तुम्हें कैसे समझाऊं
तुम्हें क्या बतलाऊं
तुम क्या हो
तुम सब कुछ
बस तुम
तुम ही तुम।

-आरती शर्मा

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