हम ने दुनिया के दर्द पाले हैं
हम तो दर्द-ए-हयात वाले हैं
चाँदनी हमसे रश्क करती है
चाँद कहता है हम निराले हैं
तुम लकीरों के हो सताये हुए
हम भी क़िस्मत के ही हवाले हैं
लोग देते हैं दोष मकड़ी को
अपने-अपने सभी के जाले हैं
हमने मेकअप को लात मारी है
लोग समझा करें कि काले हैं
मेरी तक़दीर में न हो लेकिन
मेरी उम्मीद में उजाले हैं
वक़्त ने धर दिया पहाड़ आगे
रास्ते हमने पर निकाले हैं
मुस्कुराहट को रख के चौखट पर
आँसुओं में भी घर संभाले हैं
टूटकर भी नहीं बिखर पाए
हम इरादों की पाँख वाले हैं
देख ले तो अंधेरा छुप जाए
मेरे दामन में वो उजाले हैं
सिर्फ़ अपने को ही नहीं ‘सोनी’
गिरने वालों को हम संभाले हैं
-सोनी सुगन्धा
