दर्द दिल का लिखूँ,
दर्द अपनों ने जो दिया वो लिखूँ,
दर्द जमाने ने भी कम न दिए,
दर्द किस किस का लिखूँ!
दिल तन्हा है,
दिल को इंतज़ार है अपनों का,
दिल चाहता है रहना साथ अपनों के,
दिल हार गया मगर अपनों से!
दिल में कभी प्रेम पलता था सबके लिए,
दिलों में राज करते थे हम भी कभी,
दिल तोड़ दिया किसी अपने ने,
दिल में नफ़रत पाल ली हमारे लिए अपनों ने!
दिल तो दिल है,
दिल क्या कसूर,
दिल तो प्यार करता है सबसे,
दिल में बसे हैं सिर्फ़ अपने ही!
दिल दीवाना है,
दिल बावरा है,
दिल प्रीत का सागर है,
दिल से रिश्तों को डोर बंधी होती है!
दिल में चाहे प्रेम को जगह दो,
दिल में चाहे नफ़रत को जगह दो,
दिल के किसी कोने में सदा,
दिल की धड़कनों में सदा अपनों की मूरत बसती है!
-अदिति रूसिया
वारासिवनी
