शब्द युग्म-“इधर-उधर”
जब भी मन होता है इधर- उधर,
किताबें साथ निभाती हैं।
मन मस्तिष्क से हृदय पटल तक,
सबको ही संभालती हैं।
कल आज और बीते कल का,
सीख धरोहर देती हैं।
मानव पग में दृढ़ता देकर,
मंजिल उसको देती हैं।
नव निर्मित वो सृजित पंक्तियाँ,
एक धरोहर होती हैं ।
अपने -अपने कालखंड का,
इतिहास बयां वो करती हैं ।
-सीता गुप्ता
दुर्ग (छत्तीसगढ़)
