“स्वानुभूति”
अपनी हीपीड़ा की अनुभूति मेंडूबे रह कर तुमकब तक स्वयं को /औरसमय को छलोगेजीवन ठहरने का नहींचलने का नाम हैछोड़ कर अतीत कोआगे बढ़ो /भविष्यतुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है
-डॉ. मधु प्रधानकानपुर
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