अब आ गया है उनसे, पैगाम-ए-मोहब्बत
कहते हैं हम तो अलविदा, एहतराम-ए-मोहब्बत
अब होगा वहीं वस्ल गो, कह दूँ मैं शुक्रिया
जाते हुए को कह तो दो, सलाम-ए-मोहब्बत
किस को बताऊं राज़, मुझको न इल्म है
मुश्किल है बड़ी, फ़रमान-ए-मोहब्बत
जो न हुआ हयात में, वो मौत कर गई
कैसे कहूँ मैं बेवफा, एहसान-ए-मोहब्बत
‘नायक’ तेरे हकूक में, यूँ फैसला हुआ
ये बात और है तेरी, बेबाक-ए-मोहब्बत!
-अरविन्द नायक
