एकदूजे के घर पर यारों आना जाना पड़ता है
रिश्ते नाते यार यहाँ पर जिसको निभाना पड़ता है
धन दौलत है जो कुछ भी सब धरी रह जाएगी
छोड़कर दुनियां एक दिन सबको जाना पड़ता है
आए हो दुनियां में तो फिर प्यार सभी को सीखला दो
सच्ची राहें क्या होती है यार सभी को दिखला दो
जो गिरने पर आए तो फिर हाँथ बढ़ाकर उठा देना
हम सनातनी क्या होते है संस्कार सभी को सीखला दो
-किशोर छिपेश्वर “सागर “
बालाघाट
