प्रकृति का सौन्दर्य ईश्वर की रचना है |
बड़े-बड़े पर्वत, नदियां,झरने,
सुन्दर पुष्प, लम्बे वृक्ष, वर्फ से ढके हुए पहाड़ प्रकृति का श्रंगार है |
यह मन को शांति और आंखों को सुकून देती है |
यह हमें ज़ीने की शक्ति और नया उत्साह देती है |
बड़े-बड़े पर्वत और नदियां हरे भरे वायु प्रदान करती है |
पक्षियों की चहचहाहट और बड़ी हवा तनाव दूर करती है |
हरी -भरी घांस, सुन्दर पुष्प और लम्बे पेड़ जो हवा को शुद्ध करती है |
सूरज की पहली किरण इस श्रंगार को प्रकाशित करती है |
सूरज की सुनहरी किरण पूरे वातावरण को नयी चमक बिखेर देती है |
सूरज की पहली किरण और शाम का वो ढलता सूरज हमारे जीवन को एक नया संदेश देता है |
कल-कल करती वह नदियां और खिलखिलाते फूल इस दृश्य में चार चांद लगा देता है |
वृक्षों पर हमारी सांस निर्भर है |
भोजन भी हमारा निर्भर है |
एक भी वृक्ष कटने ना दें,
हो भावना यही जन-जन की |
आओ पर्यावरण बचायें |
सभी का जीवन बेहतर बनाये |
इस मनमोहक और शांत दृश्य को,
सुरक्षित रखकर और सुन्दर बनायें |
-शिवशंकर दुबे ‘गंगेले’
वारासिवनी (जिला बालाघाट)
