“स्वानुभूती”
जो स्वानुभूत है अंतर में, वही वाणी मुखरित हो,अनुकरण के आवरण से काव्य कभी न विकसित हो।अंतरा परिवार बना प्रेरणा का अक्षय स्रोत हम सबका,अंकुरित हो नव सृजन, यहाँ हर रचना पुष्पित हो।
-आनंद पाण्डेय “केवल”
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