घिर आए बदरा,
बरस गई बूँदे,
मिट्टी की सोंधी खुशबू,
दिल मेरा बहके।
सडकों पर भरा पानी,
दादी की कहानी,
कागज की कश्ती,
बचपन की मस्ती।
महकती रसोई,
अदरक वाली चाय,
गरमागरम पकौड़े,
जिया ललचाये।
बरसी बूँदे,
भीगी वसुंधरा,
छाई हरियाली,
झूमे डाली डाली।
बरखा सुहानी लगे,
आस दिल में जगे,
प्रीत परवान चढ़े,
गीत नित नए गढ़े।
गड़गड़ाहट बादलों की,
चाहत बहे दिलों की,
प्रीत की अनुराग में,
बिछा पलकें बैठे हैं
तेरी राह में।
-स्मृति गुप्ता
जबलपुर
