भवनाएं शब्दों की मोहताज नहीं होती

पंक्ति पर काव्य रचना

पत्थर चुभते पांव में कसक हर बार नहीं होती|
चीटीं चलती पहाड़ में गिरती पर
हार नहीं होती|
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती|
सूखे पत्ते फिर हरियाली पर हार नहीं होती|
जीवन जी ले मौज मस्ती से दुखों की सोचते नहीं|
जिन्दगी की पटरी चल पड़ी ठहराव नहीं होती|
ह शब्दों की मोहताज नही होती ||

-ऊषा नौगरहिया
कटनी

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