भारत माता तेरे चरणों में,
जीवन अपना अर्पण करूं।
बलि वेदी पर चढ़ जाऊं मैं,
मां तुझको तर्पण करूं।
बिछ जाऊं अंतिम शय्या पर,
और तेरा रक्षण करूं।
छूं ना पाए शत्रु तुझको,
नष्ट उसे तत्क्षण करूं।
स्वप्न संजोया, युग स्वर्णिम हो,
मनोभाव अब संपूर्ण करूं।
सौम्य द्रग, शुक देख कर,
लक्ष्य भेदन को पूर्ण करूं।
जीवन सौंप तेरे चरणों में,
फिर मृत्यु का वरण करूं।
दीन, बंधु, स्नेही जन सम,
भर वात्सल्य आचरण करूं।
धात्री तुम हो मां भारती,
प्रक्षालन तुम चरण करूं।
कर शपथ है वसुंधरा तुझ,
सर्व संताप हरण करूं।
मातृभक्ति की ज्वाला जले नित,
पाषाण का अब घर्षण करूं।
लूं शुभाशीष, वरूं विजय को,
यही विनय प्रेषण करूं।
रिक्त ना जाए जीवन अब,
प्राणोत्सर्ग प्रतिक्षण करूं।
हर श्वांस पर है प्रभुत्व तेरा,
सर्वस्व निज समर्पण करूं।
-मुक्ति भंडारी ‘ममता’
पारा (मध्यप्रदेश)
