शब्द जब गहरे घाव दे जाते हैं,
किसी की भावनाएँ मरहम लगा जाती हैं।
शब्द तार में सजकर साज़ बन जाते हैं,
भावनाएँ उन्हीं साज़ की आवाज़ बन जाती हैं।
जो बयाँ हो अंतःहृदय से,
जिसमेंकोई राज़ नहीं होते।
ये भावनाएँ ही हैं ,
जो शब्दों की मोहताज नहीं होते।
शब्दों का अपना सौंदर्य है,
भावों की अपनी गरिमा है।
जहां शब्द दिशा दिखला सकते हैं,
वहीं भावनाओं की अपनी महिमा है।
माँ की ममता के छाँव तले
पीड़ा पल में खो जाती है।
पिता के निस्वार्थ मौन समर्पण में,
जीवन की राह संवर जाती है।
मित्र का सच्चा एक स्पर्श,
हज़ारों बातें कह जाता है।
बिन बोले जो साथ निभाए,
वही अपना कहलाता है।
प्रेम नहीं परिभाषा मांगे
न शब्दों का चाहे श्रृंगार।
निर्मल हृदय से निकल पड़े वह
जब भावनाओं की बहे बयार।
रिश्तों की डोर अक्षरों से नहीं,
विश्वास से मज़बूत होती है।
जहाँ सच्चे मन का वास हो,
वहीं प्रेम की ज्योत होती है।
-रीति झा
