मतलब

वो बात बात का मतलब बताते है,
सारा सच वो मगर कब बताते है.

कहते नहीं कब खाली करेगें दिल,
बताने को तो वो यूं सब बताते है.

है हम ही नहीं आशिक़ उन के तो,
औरों को भी वो रब बताते हैं.

कम नहीं होते ये सियासत वाले,
पतली रस्सी पे करतब बताते है.

होंगे क्या हम उनकी निगाहों में,
सूरज सिर पे है, वो शब बताते है.

ये हो गया है न्यू नॉर्मल अब तो,
वीरों की जाति, मजहब बताते हैं.

अपने तो होश उड़ जाते दिखते ही,
सूना है लोग उन को गज़ब बताते है.

रिश्ता बचा नहीं उनका इलम से तो,
कहने को उन्हे वो मकतब बताते है.

-कमलेश कंवल
उज्जैन

1 कमेंट

  • kamlesh sharma 7000878871

    शानदार धन्यवाद

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