सीने में कैद
किए समझौते
आँखों में बसे
आँसुओ को छुपा
चेहरे को प्रसन्न
बनाने के प्रयास में, जो
सभी मुश्किलों को
चुनौती दे जाती
ममतामयी, वो है
“माँ” ।
पल में गिरते
आंसुओं को हमारे
अपने प्रेम से सींच,
वट -वृक्ष का रूप दे
मीठे फ़ल जो लगा जाती
वो है माँ।
अपनी ममता से
बिन कहे , वो
भावों को समझ जाती
जीवन- प्रेम का
पाठ पढ़ाती
“माँ “शब्द को सार्थक बनाती
वो है “माँ “।
प्रेरणा बन
मशाल की लौ सी,
अपने सपने तुच्छ समझ
हमारा जीवन प्रकाशित कर
हमारे सपने
दीप्तिमान कर जाती
वो है “माँ”।
-विशाखा सिंघल
