मानसून आ जाये

मई गुज़ार के जल्दी से जून आ जाये,
हवाएं चलने लगें, मानसून आ जाये।

मैं आंखें बन्द करूँ तो मिरे ख़यालों में,
कभी मसूरी कभी देहरादून आ जाये।

ज़रा सी देर में उठकर टहलने लगता हूँ,
किसी बहाने ज़रा सा सुकून आ जाये।

कहीं से आये वो बारिश की सौंधी सौंधी महक,
मेरी शिकस्ता रगों में जुनून आ जाये।

मैं शेर कह के रिसालों में भेज देता हूँ,
किसी के काम तो आख़िर ये ख़ून आ जाये।

-अशोक मिज़ाज

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