शोर से थके हुए कानों को,
जब कोई चुप्पी छू जाती है,
मन की बंजर राहों पर,
शीतल बयार-सी बह जाती है।
सुकून तब मिलता है जब
बिना कहे भी सब समझ जाए,
आँखों में आँखें डालकर,
उम्मीद से मुस्कुरा भर पाए ।
सुकून तब मिलता है वहां,जहां
थके कदम ठहर जाए,
पेड़ की छाँव तले,
सांसे खुलकर गुनगुनाए।
सुकून तब है जब –
भीड़ के बीच अकेलेपन का एहसास न हो,
बचपन की स्मृतियों में
खोकर पलभर शरारतें पास हो।
सुकून तब मिलता जब
समंदर के किनारे बैठकर,
लहरों को गिन सकें,
और दिल के बोझ को
रेत में लिखकर मिटा सकें।
सुकून कोई मंज़िल नहीं,
ये तो एक अहसास है,
जहाँ आत्मा को मिलता है चैन,
और दिल को मिलता विश्वास है।
सुकून है समंदर का गीत,
या पेड़ों के पत्तों की सरसराहट।
जैसे हवा कहती हो धीमे से
बस खुलकर जी लो, चेहरे पर लिए मुस्कुराहट।
-रीति झा
