खोलकर जब भी तेरी चिट्ठी पढ़ी है मैंने
दर्द से भीगी हुयी आह भरी है मैंनें
मुझसे वो बात नज़ाकत से किया करती है
उसकी तस्वीर जो बक्से में रखी है मैंने
बच के रहना तू ज़माने की बुरी नज़रों से
उससे ये बात कई बार कही है मैंने
इक इसे देख के कुछ भी नहीं दिखता मुझको
तेरी तस्वीर जो इस दिल में जड़ी है मैंने
तू ही किरदार बना है मेरे अफ़साने का
इश्क़ की दास्तां गीतों में लिखी है मैंने
अब तो आजा तू मुझे छू के मुकम्मल कर दे
आरज़ू सिर्फ़ तेरी बाहों की, की है मैंने
था गर्म शाॅल, दिसम्बर था, तेरा कन्धा था
ज़िन्दगी बस उसी इक लम्हे में जी है मैंने
तू अगर आये तो पहनाऊँ मुहब्बत सै तुझे
तेरी यादों की वो जर्सी जो बुनी थी मैनें
-मंजू शाक्य
