इसको है मझधार मुहब्बत,,उसको है पतवार मुहब्बत,,,
चाहे जितनी रखो छुपाकरहो जाती अखबार मुहब्बत
एहसासों के बीच पकी हैइतनी लज्जतदार मुहब्बत
दुनिया जहर बताती जिसकोहै वो रस की धार मुहब्बत,,
हम दीवाने लोग हैं पंकजहै अपना किरदार मुहब्बत
-पंकज अंगार
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