“गौरैया की प्यास”
चलों नेक काम करते चले
पक्षी मानव का मान करे||
प्यासों को पानी पिलाते चले
जलदान कर पुण्य कमाते
अन्नदान कर भोजन कराते ||
प्यासे को जल , अन्नदान करें||
सूख जाते सर सरोवर तलैया
पशु पक्षी भूखे प्यासे नदिया
सूखा गला भूखा पेट कुम्लाया
दिल रो लेता मन तड़फ जाता ||
भोर भये चहकती गौरैया
निदा से सुबह होते जगाती
बच्चों को दान पानी लाती
चोंच में प्यार उमड़ लाती||
गौ धूनी बेला लौट आती
भर भर नयन प्रेम छलकती
बच्चों को आंचल में पसारे
मेरी नन्ही प्यारी गौरैया ||
जिन्दगी में ऐसा करो काम
हो आपका अपना नेक काम
दुआओं आशीष का मान
परोपकार में हो सम्मान ||
चलो नेक काम करते चले
प्यासों की प्यास बुझाते चले ||
-ऊषा नौगरहिया
कटनी
