ग़मों पर पार पाना चाहता हूँ
कभी हंसना हंसाना चाहता हूँ
ज़रा आओ,मनाओ तो सही तुम
बस अब मैं मान जाना चाहता हूँ
बना कर ज़िन्दगी को गीत कोई
मुसलसल गुनगुनाना चाहता हूँ
कोई तस्वीर तो भेजो तुम अपनी
नया घर है सजाना चाहता हूँ
-अशोक ‘नूर’

ग़मों पर पार पाना चाहता हूँ
कभी हंसना हंसाना चाहता हूँ
ज़रा आओ,मनाओ तो सही तुम
बस अब मैं मान जाना चाहता हूँ
बना कर ज़िन्दगी को गीत कोई
मुसलसल गुनगुनाना चाहता हूँ
कोई तस्वीर तो भेजो तुम अपनी
नया घर है सजाना चाहता हूँ
-अशोक ‘नूर’
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